समोसा, जलेबी और लड्डू सिगरेट जितने खतरनाक|”केंद्र सरकार का नया हेल्थ अलर्ट”– पढ़िए चौंकाने वाली सच्चाई

Slow poison food in India-सस्ता और स्वादिस्ट जहर क्यों खरीदते है ?

कोई धीमा जहर जिसे हम अंग्रेजी में स्लो पॉइजन कहते हैं। इस धीमे जहर को स्वादिष्ट बनाकर सस्ते दामों पर आपको बेचा जाए तो क्या आप इसे खरीदकर खा लेंगे? क्योंकि ये स्वादिष्ट भी है और सस्ता भी है। क्योंकि समोसा, जलेबी, लड्डू और पकौड़े आपके लिए धीरे-धीरे इसी प्रकार का एक धीमा जहर बन सकते हैं। अब तक आपने सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू के पैकेट पर ये चेतावनी लिखी देखी होगी जिसमें लिखा होता है कि धूम्रपान से कैंसर हो सकता है, तंबाकू जानलेवा है और इस प्रकार की जो चेतावनी है वो सिगरेट और तंबाकू के पैकेट पर अक्सर आपको देखने को मिलती है। आप पढ़ते हैं उनको जिसमें कहा जाता है कि ये आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। आम तौर पर धारणा भी यही है कि अगर कोई धूम्रपान कर रहा है, अगर कोई तंबाकू का प्रयोग करता है तो उसके शरीर को बहुत जल्द इसका बड़ा नुकसान होता है। लेकिन बहुत जल्द आपको इस तरह की चेतावनी समोसे, जलेबी, लड्डू और पकौड़े जैसी खाने-पीने की चीजों के साथ भी देखने को मिल सकती है।

Harmful effects of fried snacks-“क्या समोसा, जलेबी और लड्डू सिगरेट जितने खतरनाक हैं?”

अगर आप ये सोच रहे हैं कि आप सिगरेट नहीं पीते इसलिए आपकी सेहत को नुकसान का इतना बड़ा कोई खतरा है ही नहीं बहुत सारे लोग आपने देखा होगा जो आते हैं और कहते हैं हम तो ना सिगरेट पीते हैं ना शराब पीते हैं इसलिए हमें क्या हो सकता है? लेकिन ये सारे लोग समोसे तो खाते हैं, जलेबी तो खाते हैं, लड्डू तो खाते हैं और बड़े शौक से खाते हैं। तो ऐसे तमाम लोग जो जलेबियों के शौकीन हैं जिन्हें हर शाम को समोसा चाहिए जो बात-बात पर लड्डू खाते हैं, लड्डू बाँटते हैं ये उन सबके लिए सावधान होने का समय है क्योंकि ये आपके लिए उतना ही खतरनाक है जितना कि सिगरेट पीना, बीड़ी पीना या तंबाकू का प्रयोग करना। समोसा, जलेबी और लड्डू नए जमाने के तंबाकू हैं। इनमें मौजूद फैट, चीनी और नमक आपकी सेहत के लिए उतना ही नुकसानदेह और खतरनाक हो सकता है जितना कि सिगरेट और तंबाकू।

Samosa health warning-केंद्र सरकार की वार्निंग बोर्ड 

समोसा, जलेबी और लड्डू सिगरेट जितने खतरनाक
समोसा, जलेबी और लड्डू सिगरेट जितने खतरनाक
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक नई शुरुआत की है जिसके तहत अब समोसा, जलेबी और लड्डू की दुकानों पर ऐसे बोर्ड लगाए जाएंगे जिन पर लिखा होगा कि समोसे में कितना तेल पड़ा है, जलेबी और लड्डू में कितना घी और कितना चीनी और इस चेतावनी का उद्देश्य आपको ये याद दिलाना है बार-बार कि इन सारी चीजों में कितनी मात्रा में तेल है, शुगर है, घी है जो आपके शरीर को बीमारियों का घर नहीं बल्कि बीमारियों का पूरा का पूरा शोरूम बना देगा। शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्रालय ने केंद्र सरकार के संस्थानों को इस तरह की चेतावनी वाले बोर्ड अपनी कैंटीन, मीटिंग रूम्स और दूसरी जगहों पर लगाने का आदेश दिया। इसके अलावा सरकार के जो आधिकारिक लेटरहेड्स हैं, नोटपैड्स हैं, फोल्डर्स हैं उन पर भी आपके स्वास्थ्य से जुड़े मैसेजेस अब छापे जाएंगे। इस योजना की शुरुआत फिलहाल नागपुर के सरकारी संस्थानों में की जा रही है जिसमें एम्स नागपुर जैसे बड़े संस्थान शामिल हैं।

“Slow Poison in Your Plate? देश के लोगो को जागरूख होने की जरूरत

आज समोसा, जलेबी और पकौड़ा भारत में सिर्फ स्नैक्स नहीं है ये भारत में भूख मिटाने का एक आसान तरीका बनते जा रहे हैं। अगर आपके घर में कोई मेहमान भी आता है तो हम सबसे पहले मेहमान नवाजी के लिए या तो समोसे मंगवाते हैं, जलेबियां मंगवाते हैं, पकौड़े मंगवाते हैं या घर में बना लेते हैं और हम सोचते हैं कि ये सब खिलाकर हम अपने मेहमानों की मेहमान नवाजी करेंगे, उन्हें खुश कर देंगे। आज भारत के हर गली, हर नुक्कड़, हर चौराहे पर समोसे और जलेबी की दुकान आपको जरूर मिल जाएगी। हमारे देश में समोसा और जलेबी की जोड़ी, कचौड़ी और जलेबी की जोड़ी अब केवल खानपान नहीं है बल्कि हमारी संस्कृति का एक हिस्सा बन चुकी है। रेलवे स्टेशन हो, बस अड्डा हो, कॉलेज की कैंटीन हो या ऑफिस के बाहर चाय की कोई दुकान हो हर जगह समोसा, जलेबी या कचौड़ी आपको जरूर मिलेगा। फ्रूट सैलेड या पोहा जैसे जो हेल्दी विकल्प हैं वो आपको या तो मिलेंगे ही नहीं कहीं या बहुत ही कम मिलेंगे। इसके लिए लोगों के पास और यही एक वजह है कि लोगों के पास अब समोसा, जलेबी, कचौड़ी और पकौड़े जैसी चीज खाने के अलावा कुछ और खाने का विकल्प होता ही नहीं है क्योंकि हमारे देश की जो आम जनता है वो कहां जाएगी? बाजार में जाते हैं, बस अड्डे पर जाते हैं, रेलवे स्टेशन पर जाते हैं, दफ्तर के बाहर जाते हैं, आपकी चाय की दुकान के आसपास कहीं जाते हैं या आप अपनी कैंटीन में जाते हैं हर जगह आपको यही समोसे निकलते हुए लोग मिलेंगे और आप ये सोचते हैं कि या तो समोसा खा लेंगे, कोई पकौड़ा खा लेंगे या कचौड़ी खा लेंगे। इसके अलावा कुछ उपलब्ध भी तो नहीं है कोई खाना भी चाहे तो कैसे खाए? अपनी भूख के सामने लोग ये परवाह नहीं करते कि इनसे उनकी सेहत को बहुत नुकसान हो रहा है।

धीमा ज़हर जो रोज़ हम खा रहे हैं – समोसा, जलेबी और पकौड़ेक्यों हैं इतने खतरनाक ?

लोगों को इस बात की चिंता ही नहीं होती कि इन चीजों में मौजूद तेल और शुगर स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। ये एक टाइम बम की तरह है। आपने कई बार देखा होगा कि समोसा, कचौड़ी और पकौड़े एक ही तेल में बार-बार तले जाते हैं जिससे इनमें ट्रांस फैट की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। अब समोसा, जलेबी, पकौड़ा और लड्डू में मौजूद ट्रांस फैट, साल्ट और शुगर को नया टीएसएस वायरस कह सकते हैं। इनका आपके शरीर पर एक स्लो पॉइजन की तरह असर होता है और ये भी आपकी सेहत के लिए सिगरेट जितने ही खतरनाक होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आपको सिगरेट का धुआं दिखाई देता है लेकिन समोसे और पकौड़े में जो तैली हुई साजिश है ये आपके शरीर में चुपचाप घुलती रहती है।

Trans fat dangers India-सरकार की एडवाइजरी 

आपके शरीर को इसी साजिश से बचाने के लिए अब सरकार ने सभी सरकारी संस्थानों को एक चिट्ठी लिखी, एक एडवाइजरी दी है कि कैंटीन, मीटिंग रूम्स और सार्वजनिक स्थानों पर ये चेतावनी वाले बोर्ड लगाए जाएं जिससे आम लोगों में इस बात को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके कि आपको इस प्रकार का खाना नहीं खाना चाहिए। अगर आप खाएंगे तो आप अपने शरीर के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। देखिए समोसा, जलेबी सिम्बॉलिक है। कोई भी तली हुई चीज है, कोई भी मीठी चीज जिसमें सिर्फ शुगर ज्यादा है ये ज्यादा पड़ने में हमारे लिए हानिकारक है। ये हमें मोटा करती है, ओबेस करती है। मोटापे से भी कई प्रकार के हार्ड डिसीज हो सकते हैं। ज्यादा आउट औसत पुरुष को हर दिन औसतन ढाई हजार कैलोरीज और एक महिला को हर दिन औसतन दो हजार कैलोरीज की आवश्यकता होती है। ये आपके शरीर की जो जरूरत है ये वो है। 100 ग्राम के एक समोसे में करीब 300 कैलोरीज होती हैं यानी आपने अगर दो समोसे भी खा लिए तो आपके शरीर में 600 कैलोरीज चली गई। इसी तरह से एक मूंग दाल की कचौड़ी में करीब 200 कैलोरीज होती है। इसी तरह से अगर आपने दो जलेबी खा ली तो दो जलेबी में दो पीस जलेबी में आठ चम्मच चीनी होती है। सामान्य तौर पर एक व्यक्ति को हर रोज 25 ग्राम या कह लीजिए कि पाँच चम्मच चीनी ही खानी चाहिए उससे ज्यादा बिल्कुल नहीं। यानी आपने अगर दो जलेबियां खा ली तो एक दिन में जितनी चीनी आपके लिए जरूरी है उससे कहीं ज्यादा चीनी आप इसी में खा चुके हैं। दो गुलाब जामुन में 11 चम्मच चीनी होती है यानी एक दिन की जरूरत से छह चम्मच चीनी ज्यादा। और हमारे देश में जलेबी बड़े शौक से खाई जाती है और गुलाब जामुन भी बड़े शौक से खाई जाती है। आप भरपूर पहले खाना खाते हैं पेट भर के और फिर उसके बाद जलेबी भी खाते हैं मीठे के तौर पर और गुलाब जामुन भी खाते हैं।

सरकार ने चेतावनी वाले बोर्ड लगाने के पीछे का कारन क्या है ?

सरकार ने चेतावनी वाले बोर्ड लगाने के पीछे मोटापे को एक बहुत बड़ा कारण बताया है। भारत के लोगों में अब मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह तैली हुई चीजें खाना है जिसमें इसी प्रकार के खाने हैं समोसे, कचौड़ी, पकौड़े इस प्रकार की चीजें हैं या फिर आप मीठा खा रहे हैं जलेबी और गुलाब जामुन जैसा। आपको याद होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर भारतीय से खाने के तेल का इस्तेमाल कम से कम 10% तक कम करने की अपील की थी। एक और रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में हमारे देश में मोटे लोगों की संख्या 18 करोड़ थी। वर्ष 2050 तक भारत की एक तिहाई आबादी मोटापे से ग्रस्त हो जाएगी यानी 45 करोड़ लोगों को मोटापे की समस्या तब तक हो जाएगी हो सकता है उससे भी ज्यादा। अब आप सोचिए एक ऐसा देश जिसमें लगभग 50 करोड़ लोग ऐसे हैं जो कि मोटापे के शिकार हैं जो फिट नहीं हैं जो ना चल सकते हैं, ना भाग सकते हैं, ना दौड़ सकते हैं, ना कोई शारीरिक काम कर सकते हैं और मोटापे की वजह से उनके शरीर में ना जाने कितनी बीमारियां इस समय फल रही होंगी उस देश का भविष्य क्या होगा? नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक वर्ष 2021 में 24% महिलाएं और 23% पुरुष मोटापे से परेशान थे यानी हर 100 में से 24 महिलाएं और हर 100 में से 23 पुरुष जरूरत से ज्यादा मोटे थे। सोचिए देश में हर चौथी महिला लगभग हर चौथा पुरुष मोटापे का शिकार है। आज हमारे देश में बच्चे भी मोटापे की समस्या से परेशान हो रहे हैं। वर्ष 2021 में पाँच साल से कम उम्र के करीब 3% बच्चे मोटे थे यानी पाँच साल से कम उम्र के 100 में से तीन से ज्यादा बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं। हमारे देश में वर्ष 2008 से लेकर 2020 के बीच शहरों में मोटापा 29% तक बढ़ चुका है जबकि गांवों में मोटापा 23% तक बढ़ा है। अभी भी शहरों के मुकाबले गांवों में मोटापा बढ़ने की रफ्तार कम है क्योंकि गांव के लोग आज भी शायद उस प्रकार का खाना नहीं खा रहे हैं और वो मेहनत ज्यादा कर रहे हैं शहरी लोगों के मुकाबले। आज हमारे देश के लोगों में बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स बहुत तेजी से बढ़ रहा है। जिसका बीएमआई ज्यादा होता है वो ओवरवेट होते हैं यानी उनका वजन जरूरत से ज्यादा होता है। एक और रिपोर्ट के मुताबिक हमारे देश में वर्ष 2020 से लेकर 2035 के बीच यानी 15 वर्षों तक मोटापे का शिकार लोगों की संख्या हर साल 4% की दर से बढ़ेगी। इसी तरह से वर्ष 2020 से लेकर 2035 के बीच हर साल ओवरवेट बच्चों की संख्या भी 6% से ज्यादा की दर से बढ़ेगी।

Harmful effects of fried snacks-मोटापे से देश को नुकसान

2019 में हमारे देश में मोटे लोगों की वजह से करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। बिना किसी युद्ध या प्राकृतिक आपदा के केवल खानपान की लापरवाही की वजह से अनफिट शरीर की वजह से हमारी अर्थव्यवस्था को करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। ये तो हम आपको पुराना डाटा दे रहे हैं अब तो और भी ज्यादा हो रहा होगा। अगर आज इसे नहीं रोका गया तो वर्ष 2030 तक मोटापे की वजह से हमारे देश को हर साल करीब 7 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा। आज हम रक्षा पर हर साल जितना पैसा खर्च करते हैं वर्ष 2030 में मोटापे की वजह से उतना ही पैसे का नुकसान एक साल में हमारा होने लगेगा। लेकिन वर्ष 2050 तक मोटापे की वजह से नुकसान कई गुना बढ़ जाएगा जो बेहद चिंताजनक है। 2050 में हमारे देश में मोटापे की वजह से हर साल 71 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होने लगेगा ऐसा एक अनुमान है। इसका कारण क्या है? अगर आज आप अपने चारों तरफ देखेंगे आप भी ये सर्वे कर सकते हैं इसके लिए सरकार का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। कल जब आप अपने घर से बाहर निकले तो अपने आसपास लोगों को देखिएगा और ये देखिएगा कि आपके आसपास कितने लोग आपको फिट दिखाई दे रहे हैं, कितने लोगों के पेट बाहर निकले हुए हैं, कितने लोग ऐसे हैं जिन्हें आप ये कहेंगे कि ये मोटापे का शिकार हैं और कितने लोग बिल्कुल फिट हैं। अगर आप हाल के 10-15 साल से भी तुलना करेंगे तो अब ऐसे लोगों की संख्या आपके आसपास कहीं ज्यादा दिखती है जो अनफिट हैं। और भारत में बीते कुछ दशकों में खाने-पीने का जो पैटर्न है वो बहुत बदल चुका है। आज हमारे देश में 38% लोग तला हुआ यानी फ्राइड या फिर प्रोसेस्ड फूड खाते हैं। केवल 28% लोग ही हैं जो सेहतमंद खाना इस समय पसंद करते हैं। आज हमारे देश में 10 में से चार लोग स्वाद को प्राथमिकता देते हैं और सेहत पर ध्यान नहीं दे रहे इसलिए आज हमारे देश में ये मोटापा इतनी तेजी से बढ़ रहा है। आज से कुछ दशक पहले सरसों के तेल की कुछ बूंदों का इस्तेमाल करके खाना बन जाया करता था लेकिन अब हर खाना तेल में तला जा रहा है और आज हमारे देश में हर व्यक्ति औसतन हर साल करीब 19 लीटर खाने के तेल का इस्तेमाल करता है। भारत में हर रोज करीब 6 करोड़ समोसे बेचे जाते हैं। ये भी आप देख लीजिए हर रोज 6 करोड़ समोसों की बिक्री है हमारे देश में। ये तो एक एस्टीमेट है हो सकता है इससे ज्यादा भी हो। वर्ष 2024 में हमारे देश में स्नैक्स का बाजार 45000 करोड़ रुपए का था। 2030 तक ये बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का हो जाएगा।

Slow poison food in India-देश के लॉगो को सेहतमंद फ़ूड खाने की जरूरत

आज खाने का जो सामान सस्ता है वो सेहतमंद नहीं है और जो महंगा है उसे लोग खा नहीं रहे। आज कोई भी हेल्दी फूड बेचना नहीं चाहता कोई भी दुकानदार। आप जाएंगे तो आप देखेंगे कि दुकानों पर इसी प्रकार का खाना मिल रहा है समोसे मिल रहे हैं, ब्रेड पकौड़े मिल रहे हैं लेकिन आपको स्वास्थ्यवर्धक खाना दुकान पर नहीं मिलेगा क्योंकि ये खाने की कोई डिमांड ही नहीं है। अगर किसी दुकान पर आपको स्प्राउट्स मिल जाए, फ्रूट चाट मिल जाए, सैलेड मिल जाए तो उसकी बिक्री शायद होगी ही नहीं। मजबूरन दुकानदार हेल्दी खाने का सामान बेचना बंद कर देता है और फिर वापस समोसा और जलेबी बेचने लगता है। लेकिन आपको अपनी सेहत का खुद ख्याल रखना है इसमें सरकार का भी इंतजार मत कीजिए। इसलिए आज से आपको तीन सावधानियां बरतनी हैं। पहला फ्राइड खाना तैली हुई चीजें अब कम से कम खाइए बहुत ही मजबूरी हो जाए मुंह में अगर आपके पानी आने ही लगे तो वो भी कम से कम कभी-कभी आप इस तरह का फ्राइड खाना खाइए नहीं तो बिल्कुल मत खाइए ये जहर की तरह है। दूसरी बात पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दीजिए क्योंकि इसमें ट्रांस फैट होता है और इससे आपके शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान होता है कि जो पैकेट बंद नमकीन आप खाते हैं ये आपके लिए बहुत खतरनाक होती है। पैकेट में जो भी सामान आप लेकर आ रहे हैं खाने-पीने का जो भी स्नैक्स आप लेकर आ रहे हैं ये सारा आपके लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि इसमें ट्रांस फैट होता है और तीसरा खाने का जो नमकीन सामान है खाने के जो स्नैक्स हैं जो आप बाहर से खरीद कर लाते हैं इसे अपने घर में बनाइए। आपको याद होगा आज से कुछ वर्ष पहले तक हमारे घर में ही हमारी रसोई में सारे स्नैक्स बना करते थे। हमें कुछ भी अगर खाने का मन है तो हमारे घर में बनता था। घर में स्नैक्स बनाकर उन्हें डब्बों में रख दिया जाता था ताकि जिसका जब मन करे वो खा सके लेकिन अब वो सब बंद हो चुका है। इसलिए आपको पता होगा कि आपने किस तेल का इस्तेमाल किया है अगर आपके घर में बना है तो कितना इस्तेमाल किया गया है और आपने किन मसालों का प्रयोग किया है इसमें रॉ मटेरियल क्या है आपको सब पता होगा। इसलिए आज से नियम बनाइए कि खाने में आपको मीठा बिल्कुल कम कर देना है। बातें मीठी-मीठी कीजिए लेकिन मीठा मत खाइए और अब प्लेट में रखे हुए समोसे को सिर्फ स्वाद से नहीं बल्कि सेहत के तराजू पर भी तोलकर देखिए |  read more .
 
 
 
 

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