ईरान-इज़राइल युद्ध: ईरान में फंसे भारतीय छात्र -मोदी की रणनीति
ईरान में फंसे भारतीय छात्र, क्या भारत सुरक्षित वापसी करा पाएगा?
ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर को हिला कर रख दिया है। ऐसे में ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर हर कोई चिंतित है। क्या मोदी सरकार समय रहते इन छात्रों को भारत ला पाएगी?यहाँ से जानियें ईरान-इज़राइल संघर्ष की सच्चाई, भारत की रणनीति और अब तक के सभी अपडेट। पूरी जानकारी और लाइव अपडेट्स के लिए पढ़ें यह खास रिपोर्ट।

ईरान में भारतीय फंसे छात्र, भारत सरकार की बड़ी परीक्षा!
भारतीय दूतावास में वहां से हर व्यक्ति चाहता है कि वह जल्दी से जल्दी तेहरान से बाहर निकल जाए | आप यह सारे वह लोग हैं जो तेहरान से बाहर निकल जाना चाहते हैं, जल्दी से जल्दी और ऐसा नहीं है कि सिर्फ ईरान के लोग ही अपना देश छोड़कर भाग रहे हैं, बल्कि ईरान में फंसे भारतीय भी तेहरान और दूसरे शहरों से आर्मेनिया पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं |ईरान में मौजूद भारत के लोग जो हैं वह भारतीय दूतावास की मदद ले रहे हैं भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों से यह अपील की है कि वह तुरंत तेहरान शहर को छोड़कर किसी भी सुरक्षित स्थान पर चले जाए |
ईरान में फंसे भारतीय छात्र: ईरान में कितने भारतीय छात्र फंसे हैं?
भारत की सरकार इन लोगों को सुरक्षित वापस अपने देश लाने की कोशिश कर रही है |ईरान में इस समय 10000 से ज्यादा भारतीय मौजूद हैं जिनमें छात्रों की संख्या 2500 से भी ज्यादा है| तेहरान में भारतीय दूतावास ने ईरान के स्थानीय अधिकारियों से बातचीत की है और उनसे भारतीय छात्रों को तेहरान से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मांगी है |ईरान में मौजूद भारतीय छात्रों को भारतीय दूतावास से संपर्क करने के लिए कहा गया है |
ईरान में फंसे भारतीय छात्र : मोदी सरकार की रणनीति
जिसके लिए भारतीय विदेश विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की है ,तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेस इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेस में पढ़ने वाले भारत के छात्रों के लिए स्पेशल बसों की व्यवस्था की गई है| जिससे वह तेहरान से सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके इजराइल तेहरान पर हवाई हमले कर रहा है ,इसलिए हवाई रूट से एयर रूट से ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालना अब संभव नहीं है |जिसको भी जाना है सड़क मार्ग से ही जाना पड़ेगा | इसी वजह से इन छात्रों और बाकी लोगों को तेहरान से 1100 किलोमीटर दूर आर्मेनिया की सीमा पर लाया जा रहा है और बाद में आर्मेनिया से इन्हें भारत लाया जाएगा |छात्र समूह में आके भारत सरकार से मदद मांग रहे हैं और हर बार की तरह भारत सरकार अब अपने किसी भी नागरिक को पूरी दुनिया में वह कहीं भी फंसा हो अब अकेला नहीं छोड़ती और इन छात्रों को भी बहुत जल्दी सुरक्षित भारत लाने की तैयारी चल रही है|
ईरान में फंसे भारतीय छात्र: आखिर क्यों जाते हैं पढ़ाई के लिए भारतीय छात्र ईरान?
अब आज आपके मन में यहां यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि भारत के लिए हजारों छात्र आखिर ईरान की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में पढ़ने के लिए जा क्यों रहे हैं |ईरान क्यों जा रहे हैं, अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में ऐसे शिक्षण संस्थान नहीं हैं ,ऐसे स्कूल कॉलेज नहीं हैं,जो उच्च शिक्षा के लिए बहुत प्रतिष्ठित हो| ऐसे नहीं है कि उनका बड़ा नाम हो ईरान को कोई दुनिया में ऐसे देश के तौर पर नहीं जानता ,जहां लोग पढ़ाई करने के लिए रिसर्च करने के लिए जाते हैं |दुनिया की टॉप 500 यूनिवर्सिटीज में ईरान की सिर्फ दो यूनिवर्सिटीज आती हैं लेकिन इसके बावजूद भारत से हर साल औसतन 1000 से ज्यादा छात्र ईरान में पढ़ने के लिए जाते हैं| वर्ष 2021 में 1750 ,2022 में 163, 2023 में 1020 और 2024 में भी लगभग इतने ही छात्र ईरान में पढ़ने के लिए जाते हैं| यानी हर साल लगभग 1500 छात्र जाते हैं |ईरान इनमें भी 75% छात्रों ने मेडिकल यानी एमबीबीएस और डॉक्टर बनने की पढ़ाई करने के लिए ईरान के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया है |
ईरान में फंसे भारतीय छात्र:ईरान में MBBS करने की वजहें
आपके मन में यह भी सवाल होगा कि जिस ईरान में सिर्फ 64 मेडिकल यूनिवर्सिटीज और मेडिकल कॉलेज हैं वहां भारत के छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जा क्यों रहे हैं| इसके तीन कारण पहला ईरान एक मुस्लिम देश है और भारत से वहां ज्यादातर मुस्लिम छात्र ही पढ़ने के लिए जा रहे हैं |
दूसरा भारत में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट की परीक्षा में पास होना अनिवार्य है लेकिन जो 12 लाख से ज्यादा छात्र पास होते हैं उनमें से भी बहुत ही कम छात्रों को सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल पाता है और बाकी के छात्रों के लिए मेडिकल सीटें हमारे देश में बचती नहीं, इसके कारण बहुत सारे छात्र ईरान और यूक्रेन जैसे देशों में जाकर मेडिकल की पढ़ाई करते हैं| ईरान में उन्हीं छात्रों को दाखिला मिलता है जिन्होंने भारत में नीट परीक्षा पास की होती है|
तीसरी बात भारत के मुकाबले ईरान में मेडिकल की जो पढ़ाई है वह बहुत सस्ती है भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च कम से कम 30 से 50 लाख रुपए तो है ही जबकि ईरान में 7 से 10 लाख रुपए में यह पढ़ाई हो जाती है |
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