“कैसे 5 रुपये में बिकने वाला बिस्किट बना इंडिया का सबसे बड़ा ब्रांड?”16,000 करोड़ की कंपनी – पारले जी की अनसुनी कहानी!”

1. पारले जी: हर चाय की पहली पसंद

पारले जी बिस्किट, इसे चाय में, दूध  में, या फिर पानी में डिप करके खाने का अपना अलग ही मजा है, जमाना बदल गया, लेकिन ये बिस्किट आजादी के पाहले जैसा था, आज आजादी के 76 वर्स बाद भी वैसा है, वही टेस्ट और वही कॉलिटी, हलाकि इसमें इस्तेमान होने वाले रॉ मेटिरियल्स, मैन पावर, मशीनिरी और ट्रांस्पोर्टेशन कॉस्ट दस गुना तक महंगा  हो गए, लेकिन पिछले 30 सालों से इसका छोटा पैक सिर्फ 5 रुपए का ही मिलता है |

2. आज़ादी की सोच से जन्मा पारले जी

मोहनलाल दयाल जी को हमेशा खटक दे थी, उस समय अंग्रेजों से आजादी के लिए देश में कई तरह के आंदोलन चल रहे थे, और गाधी जी के असहयोग आंदोलन से मोहनलाल इतने इंप्रेस हुए, कि अपने देश में ही कंफेक्शनरी का बिजनस शुरु की ,एक कैंडी मेकर मशीन भी खरीद कर लिया, साल था 1929, मोहनलाल दयाल जी मुंबई के विले पारले में एक पुरानी फैक्टरी को खरीद कर उसमें जर्मनी से लाई हुई कैंडी मेकर मशीन इंस्टॉल करा करते देते हैं| 

3. देसी कैंडी से बिस्किट तक का सफर

अपनी फैमिली के ही बारह लोगों के साथ मिलक शुरू किया| हालाकि उसके बाद भी कई और तरह के कैंडीज बनाये गए, जिसने मार्केट में बहुती देजी से अपनी जगह  बनाई, क्योंकि यह देशी स्वाद  में बनाया गया भारत का पहला कॉंफेक्शनरी प्रोड़क्ट था, उस समय अंग्रेज अपनी चाय के साथ बिस्किट ख्य करते थे |टेस्ट में भी यह बिस्किट काफी अच्छा था, इसलिए देखते ही देखते यह इंडियन मार्केट में इतना देजी से पापुलर हुआ, कि अंग्रेज भी पारले गलूको बिस्किट को बहुत ज्यादा यूज करने लगे, और मार्केट में मौजुद ब्रिटिस ब्रैंड के बिस्किट न बिकने लगी |

4. जब कंपनी को करनी पड़ी बंद

पारले को इतना भी रॉ मटेरियल नहीं मिल पा रहा था, कि वो प्रोडक्शन को जारी रख पाए, मजबूरन कंपनी को कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा, लेकिन जब फिर से हालात कुछ बेहतर हुए, और पारले ने बिस्किट का प्रोडक्शन शुरू किया, तो पारले अलग और प्रीमियम दिखने के लिए टू स्ट्रेटिजीज पर काम किया, सबसे पहले तो उसने अपनी नॉर्मल पैकेजिंग को चेंज करके एक पीले वैक्स पेपर का इस्तेमाल करना शुरू किया, और जहां पैकेट पर पहले गाय और गॉलम की फोटो हुआ करता था | 

5. पारले गर्ल: भारत की पहली पैकेजिंग आइकन

 जहां पैकेट पर पहले गाय और गॉलम की फोटो हुआ करती थी, लेकिन आगे चलकर कवर पर जो छोटी लड़की थी, उसी को अपना ब्रेंट एम्बेस्टर बना कर और जीफ और जीनियस के मैसेस के साथ टीवी पर जोर सोर से अडवर्टाइस करना शुरू कर दिया, | पारले जी

6. 5 रुपए का दाम, 30 साल से बिना बदलाव

जब कंपनी ने बिस्कुट का दाम 50  पैसे बधाई ,तब लोग सड़क पर उतर कर विरोध करने लगे, तो ऐसे में सवाल ये उठता है कि कोई कमपनी भला अपने प्रोड़क्ट का प्राइस इतने लंबे समय तक सेम कैसे रख सकती है, इसे समझने के लिए पारले की बिजनस स्ट्रेटजी को समझना जरूरी है, अब लोगों की पॉपुलरिटी और कम कीमत की वज़ा से पारले जी हर दुकान, हर घर और हर वर्ग के लोगों के बीच नजर आता रहे, जिससे की कमपनी की प्रांट अवेरनेस बनी रहे, लेकिन बिना प्रॉफिट के सिर्फ अवेरनेस से तो कमपनी चल नहीं सकती.| 

7. बिज़नेस स्ट्रेटजी: कमाई दूसरे प्रोडक्ट्स से

इसलिए पारले ब्रेंड के अंदर धीरे धीरे मुनैको, ग्रैचेक और हाइड एंड सिक जैसे हाई प्रॉफिट प्रोडक्ट्स को भी लॉंच किया गया और इस तरह कंपनी जो प्रॉफिट पारले जी से नहीं कमा पाती, वो इन प्रोडक्ट्स से एडजस्ट कर लेती है लेकिन ये स्ट्रेटजी भी जादा दिन तक काम नहीं कर सकती थी क्योंकि कंपनी के टोटल सेल्स में पारले जी का कॉंट्रिबूशन 50% से भी ज्यादा का है|  और महंगाई की वज़ह  से पारले जी बिस्किट का प्रोडक्सन कॉस्ट काभी तेजी से बढ़ने लगा लेकिन मुसीवत ये थी कि दाम तो बढ़ा नहीं सकते थे|  इसलिए दाम को 5 रुपए पर ही फिक्स रखते हुए कंपनी ने पैकेट के साइज को छोटा करना शूल कर दिया 90’s में जो पारले जी 5 रुपए में 100 ग्राम के पैक में मिला करती थी | आज 5 रुपए में सिर्फ 55 ग्राम का पैकेट मिलता है यानि कि दाम तो लदबग दूना हो गया लेकिन लोगों को एहसास तक नहीं हुआ

८ . लागत घटाने के गुप्त तरीके

इसके अलावा  भी पारले ने कुछ बुनियादी चीजों पर इतनी बारीकी से ध्यान दिया कि उनका प्रोड़क्शन कॉस्ट अपने कंप्टीटर से हमेशा कम रहा है जैसे कि वो रॉ मेटेरियल्स काफी सस्ते रेट पर सीधे उसके सूर्से से ही खरीदते हैं जिसे कि बीच के मेडियेटर का कमिशन खत्म हो जाता है कहते हैं ना कि जो पैसा रॉ मेटेरियल्स की खरीद में बचा लिया जाए वो company के लिए सीधा  net profit की तरह होता है और दोस्तों आप तो जानते ही है confectionery और food industry में wastage एक बड़ी problem है लेकिन पारले की एक बहुत ही अच्छी बात ये भी है कि उनका wastage ना के बराबर है आपको जानकर हैरानी होगी कि पारले जी का 115 टन biscuit बनाने में सिर्फ 1% का wastage होता है साथ ही उनका production line भी इतना properly managed है कि उसकी efficiency भी काफी high है जो product के cost को control करने में मदद करती है पारले को जब ये realize हुआ कि उनके customers काफी price sensitive है तो उसने अपने branding और packaging जैसी चीजों पर होने वाले खर्च को जितना हो सकता था उतना कम कर दिया यही वज़ा है कि पहले जहां पारले जी biscuit wax paper की premium packaging में आती थी आज वो एक सस्ती plastic packaging में आने लगी है

9. स्मार्ट फैक्ट्री लोकेशन और प्रोडक्शन मैनेजमेंट

factories की strategic location भी पारले जी के low price होने की एक main वजह  है दरसल जितने भी जगहों से distribution के एक बड़े हिस्से को cover किया जा सकता था पारले जी ने उन सभी जगहों पर अपनी factories लगाई हुई है यही वज़ा है कि आज हमें मुंबई, करनाटक, राजस्थान और हर्याना जैसे कई जगहों पर पारले जी की factories दिखाई देती है|  और इन में से कोई भी factory main city से 60 किलो मीटर से जादा distance पर नहीं है|  जिससे फायदा यह है कि उनके transportation और logistic cost में काफी वज़त हो जाती है|  2003 में पारले जी को दुनिया में सबसे जादा बेचा जाने वाला biscuit टिकलीर किया गया और जैसे जैसे वक्त बीटता गया पारले जी एक सामराजी की तरह हो गया लोगों की जरूर्तों के हिसाब से हर साइज के packet का option market में रखा गया| 

10. दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट

पारले जी biscuit की success का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अपने 130 से भी ज़्यादा फैक्ट्रीज के जरिये  ये हर महीने 100 करोड पैकेट का प्रोड़क्शन करते हैं देश के 50 लाख  से भी जादा रिटेल स्टोर्स के जरिये पारलेजी बिस्किट को बेचा जाता है और हर सेकेंड लगभग  45 सो लोग इस बिस्किट को खाते हैं|  इंडिया के अलावा   दुनिया के साथ और कंट्रीज में भी इनके मैनुफेक्ट्रिंग प्लांट है | 2013 में जब कंपनी ने बताया कि सिर्फ बिस्किट से ही उन्होंने करीब 5000 करोड की सेल की है तो हर कोई हैरान हो गया क्योंकि पारले जी या करिश्मा करने वाला भारत का पहला FMCG ब्रेंड था कोविट लॉकडाउन के दोरान भी कंपनी का सेल्ज घिरने की बजाय इसके सेल्ज में तेज उच्छाल देखने को मिला क्योंकि सबने पारले जी बिस्किट पर ही अपना भरोसा जताया  था तो दोस्तों ये था पारले जी बिस्किट की पूरी कहानी |

रीड मोर। ….

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