वंदे भारत एक्सप्रेस की असली कहानी – स्पीड, इतिहास और निर्माता का संघर्ष | यहाँ से जानिए सम्पूर्ण जानकारी

 वंदे भारत एक्सप्रेस की असली कहानी – भारत की ड्रीम ट्रेन की प्रेरणादायक कहानी


वन्दे भारत एक्सप्रेस सिर्फ 52 सेकंड में 100 किलो मिटर प्रति घंटे की स्पीड पकड़ सकती है, 180 किलो मिटर प्रति घंटे की रफतार से चल सकती है। वन्दे भारत एक्सप्रेस जिसमें 0% जर्क होता है ,जिसके आगे यूरोप की मॉरन ट्रेने फेल है | क्या आपको पता है वन्दे भारत एक्सप्रेस को किसने बनाया? इकिस्वी सदी में भारत की सबसे बेहतरीन ट्रैन को बनाया? ट्रेन की कहानी क्या है? कौन है वो अंसंग हीरो जिसने वन्दे भारत ट्रेन को बनाने के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था?आइये जानते है वंदे-भारत-एक्सप्रेस-की-असली-कहानी। .

वंदे भारत एक्सप्रेस कितनी तेज है?

वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज और आधुनिक ट्रेन है:

  • 0 से 100 किमी/घंटा सिर्फ 52 सेकंड में | 

  • अधिकतम रफ्तार 180 किमी/घंटा | 

  • 0% जर्क (tilt-free design) – जिससे यूरोप की कई हाई-स्पीड ट्रेनें भी पीछे रह जाती हैं | 


वंदे भारत एक्सप्रेस का निर्माता कौन है?

इस ट्रेन के पीछे असली हीरो हैं सुधांशु मणि, ICF (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई) के जनरल मैनेजर, जिन्होंने अपने करियर और इज्जत दांव पर लगाकर इसे बनाया।

 ICF के जनरल मैनेजर सुधांशु मणि 

  • 1981 में रेलवे जॉइन किया।

  • 1990 से भारत में मॉडर्न रेलवे का सपना देख रहे थे।

वंदे-भारत-एक्सप्रेस-की-असली-कहानी


कहानी की शुरुआत – 2016 से 2017

साल 2016 में, रेलवे में मॉडर्नाइजेशन की चर्चा चल रही थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट आदेश दिया:

“विदेश से ट्रेन खरीदने के बजाय भारत में वर्ल्ड-क्लास ट्रेन बनाई जाए।”

रेलवे के अधिकारी विदेशी ट्रेन खरीदने में लगे थे, लेकिन सुधांशु मणि ने तय किया कि यह ट्रेन भारत में ही बनेगी।


संघर्ष – मंजूरी और समय की लड़ाई

  • रेलवे बोर्ड के ज्यादातर अधिकारी विदेशी ट्रेन के पक्ष में थे।

  • उन्होंने पूछा रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए पैसा कहां से आएगा | क्या हमें इसकी इजाजत मिलेगी रेल मंत्रालय से मंजूरी कौन दिलाएगा इस पर सुधान्शु मडी ने कहा, मैं तुम्हारा लीडर हूँ, मनजूरी दिलाने के जिम्मेदारी मेरी है।

  • मंजूरी दिलाना मुश्किल था।

  • डिजाइन और निर्माण में आमतौर पर 3 साल लगते हैं, जबकि उनके पास सिर्फ 1.5 साल थे।

सुधांशु मणि ने चेयरमैन से कहा:

“अगर आप मंजूरी नहीं देंगे, तो मैं आपके पैरों में गिर जाऊँगा और तब तक नहीं उठूँगा जब तक हाँ नहीं कर देंगे।”

आखिरकार मंजूरी मिल गई।इस बात को सुनकर वहाँ सब खुश हुए, लेकिन कुछ लोगों के मन में सवाल थे, इस पर सुधान शुमणी ने कहा, अगर हम इस शानदार ट्रेन को बनाने में कामयाब  हो जाते हैं, तो इसका क्रेडिट आप लोगों को जाएगा. लेकिन अगर फेल हो गए तो जिम्मेदारी मेरी होगी. इसलिए आप लोग ये चिंता मत कीजिये और काम में लग जाइये | 


ट्रेन 18 – भारत की पहली वर्ल्ड-क्लास ट्रेन

देर सवेरे तक लगातार बिनाथके  बिना रुके काम करने के बाद अक्टूबर 2018 तक ट्रेने टीम तयार कर  चुकी थी। ट्रेन को पट्री पर उतारने से पहले कई राउंड के सिक्यूर्टी चेकिंग हुई। स्पीड, ब्रेक और कमफर्ट  के लिए इसे कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ा।

प्रोजेक्ट का नाम रखा गया Train 18

  • इंटीरियर डिजाइन के लिए विदेशी कंसल्टेंट रखे गए, लेकिन डिजाइन राइट्स भारत के पास रहे।

  • 80% मटीरियल भारत में बना, 20% विदेश से आया।

  • रिकॉर्ड समय में अक्टूबर 2018 तक ट्रेन तैयार हो गई।


लॉन्च – 15 फरवरी 2019

  • फिर 15 फरवरी 2019 को भारत की पहली ट्रेन 18 के शुरुवात हुई नाम रखा गया
    वन्दे भारत दिल्ली से वारानसी के बीच चली इस ट्रेन का शुबारम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किये | 
     
     

    नाम रखा गया – वंदे भारत एक्सप्रेस


वंदे भारत एक्सप्रेस का महत्व

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